Friday, October 1, 2021

कुछ एक फैसले मजबूरियों के होते है

तमाम फतवे कहाँ मुफ्तियों के होते है
कुछ एक फैसले मजबूरियों के होते है

बुजुर्ग जिनके उठाते नही किसी पे नज़र
दुपट्टे सर पे उन्ही बच्चियों के होते है

जो आँधियों में भी रूकती नहीं है रोके से
गुलाब सिर्फ उन्ही तितलियों के होते है

वो सब्ज़ रंग का स्वेटर वो सुर्ख सेब से गाल
कई मज़े भी मियां सर्दियों के होते है

तअल्लुकात में बरसो के पड़ गई है दरार
यही नतीजे गलतफहमियों के होते है

ज़मीन बांटना अच्छा नहीं मिरे भाई
खसारे इसमें कई पीढ़ियों के होते है

ये कारोबार तो मीरासियो के होते है

"तुफ़ैल' आयेंगे इतने कहाँ से राजकुमार
कि ऐसे ख्वाब सभी लड़कियों के होते है
-तुफैल चतुर्वेदी

2 comments:

  1. बहुत ही प्यारी, बढ़िया प्रस्तुति!! एक से बढ़कर एक शेर! एक की तारीफ़ करते हैं तो दूसरे की महिमा कम हो जाती है। फिर भी ---
    बुजुर्ग जिनके उठाते नही किसी पे नज़र
    दुपट्टे सर पे उन्ही बच्चियों के होते है
    "तुफ़ैल' आयेंगे इतने कहाँ से राजकुमार
    कि ऐसे ख्वाब सभी लड़कियों के होते है👌👌👌👌🙏🙏🙏🙏 तुफैल जी से परिचय बहुत अच्छा लगा। आभार यशोदा दीदी। साहित्य के मोती सहेजने में आपका कोई सानी नहीं है!🙏🙏🌷🌷🌷
    वा

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