Friday, August 21, 2020

मुंडेर पर पतझड़ ....अशोक लव


एकाकीपन के मध्य
स्मृतियों के खुले आकाश पर
विचरण कर रहे हैं
उदासियों के पक्षी

कहाँ-कहाँ से उड़ते चले आ रहे हैं
बैठते चले जा रहे हैं
मन मुंडेर पर!
भीग गया है अंतस का कोना-कोना

क्यों आ जाता है
वसंत के तुंरत बाद
पतझड़ ?
क्यों नहीं भाती उदासियों को
खुशियों की
नन्ही चमकीली बूँदें ?

-अशोक लव

8 comments:

  1. बहुत बढ़िया

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 21 अगस्त 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत खूबसूरत रचना

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  4. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर...
    क्यों आ जाता है
    वसंत के तुंरत बाद
    पतझड़ ?
    क्यों नहीं भाती उदासियों को
    खुशियों की
    नन्ही चमकीली बूँदें ?

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  5. बेहद खूबसूरत रचना।

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