इक सीख ना सकें, हम तुम्हे भुलाना,
हमने खुद को, भुलाना सीख लिया।
अपनी खुशियाँ , हम छिपा ना सके,
इक ग़म को, छिपाना सीख लिया।
नहीं सीख सके, तुम्हे अपना बनाना
पर जग अपना, बनाना सीख लिया।
कभी तुमसे प्यार, हम जता ना सके,
पर दुनिया से, जताना सीख लिया।
सीख ना सकें हम, बस तन्हा रहना,
इक तेरी यादों मे, जीना सीख लिया।
बस अपना जीवन, हम जी ना सके,
तेरी खुशियों मे, जीना सीख लिया।
- सुरेश पसारी "अधीर"
हमने खुद को, भुलाना सीख लिया।
अपनी खुशियाँ , हम छिपा ना सके,
इक ग़म को, छिपाना सीख लिया।
नहीं सीख सके, तुम्हे अपना बनाना
पर जग अपना, बनाना सीख लिया।
कभी तुमसे प्यार, हम जता ना सके,
पर दुनिया से, जताना सीख लिया।
सीख ना सकें हम, बस तन्हा रहना,
इक तेरी यादों मे, जीना सीख लिया।
बस अपना जीवन, हम जी ना सके,
तेरी खुशियों मे, जीना सीख लिया।
- सुरेश पसारी "अधीर"






