Tuesday, July 23, 2013

काँटों से भी निबाह किये जा रहा हूँ मैं................जिगर मुरादाबादी



दिल में किसी के राह किये जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किये जा रहा हूँ मैं

फर्द-ए-अमल सियाह किये जा रहा हूं मैं
रहमत को बेपनाह किये जा रहा हूँ मैं

ऎसी भी एक निगाह किये जा रहा हूँ मैं
ज़र्रों को महर-ओ-माह* किये जा रहा हूँ मैं

गुलशन परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़
काँटों से भी निबाह किये जा रहा हूँ मैं

यूं ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ तेरे बगैर
जैसे कोई गुनाह किये जा रहा हूँ मैं
[*महर-ओ-माह: सूरज और चाँद]

--जिगर मुरादाबादी 

मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश 
पने आप को गर्वित महसूस करता है कि 
बीसवीं सदी सन् 1890 में यहां 
मशहूर श़ायर अली सिकंदर ज़िग़र मुरादाबादी ने जन्म लिया
उन्होंने श़ायरी की राह में ख्याति अर्जित की विशेषकर 
वे बेहतरीन ग़ज़लों के ग़ज़लगो थे...वे मुश़ायरों में ज़ान डाल देते थे
ज़िगर साहब 70 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के 
गोण्डा शहर में  1960 में ज़न्नतनशी हुए
सौजन्यः बेस्ट ग़ज़ल

11 comments:

  1. आपकी रचना कल बुधवार [24-07-2013] को
    ब्लॉग प्रसारण पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
    सादर
    सरिता भाटिया

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  2. बहुत ही सुन्दर

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  3. जिगर मुरादाबादी जी की सुन्दर नज़्म प्रस्तुति हेतु धन्यवाद.

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  4. सुंदर रचना और अभिव्यक्ति !!

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  5. सुन्दर प्रस्तुति ....!!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बुधवार (24-07-2013) को में” “चर्चा मंच-अंकः1316” (गौशाला में लीद) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  6. बहुत सुंदर
    यादे ताजा हो गई
    मुरादाबाद काफी समय तक रहा हूं, बहुत सुना हूं जिगर मुरादाबादी को



    मुझे लगता है कि राजनीति से जुड़ी दो बातें आपको जाननी जरूरी है।
    "आधा सच " ब्लाग पर BJP के लिए खतरा बन रहे आडवाणी !
    http://aadhasachonline.blogspot.in/2013/07/bjp.html?showComment=1374596042756#c7527682429187200337
    और हमारे दूसरे ब्लाग रोजनामचा पर बुरे फस गए बेचारे राहुल !
    http://dailyreportsonline.blogspot.in/2013/07/blog-post.html

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  7. सुन्दर प्रस्तुति ..

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