
मेघ सांवरे उमड़े, बरसेंगे
खुशियों से आंचल भर देंगे
कोपल-कोपल मुस्काई धरती
फिरसे अंखुआए अहसासों में
चितवन रस में भीगे कांपे
दूरियाँ न रहीं अब राहों मे
आकाश सिमटते देखा है इसने
फुनगियों की नन्ही-सी बाहों में।
-शैल अग्रवाल

मेघ सांवरे उमड़े, बरसेंगे
खुशियों से आंचल भर देंगे
कोपल-कोपल मुस्काई धरती
फिरसे अंखुआए अहसासों में
चितवन रस में भीगे कांपे
दूरियाँ न रहीं अब राहों मे
आकाश सिमटते देखा है इसने
फुनगियों की नन्ही-सी बाहों में।
-शैल अग्रवाल
तितली वह मेरी सबसे सुंदर
सबसे चमकीले पंखों वाली
फूल-फूल इतराती फिरती
मेरी ही बगिया में आकर
मेरे ही हाथों में ना आती
बहुत प्यार करता हूँ इससे
इसने प्यार की कद्र ना जानी
आजादी है प्रेम कोई बन्धन नहीं
कहती और झटसे ये उड़ जाती।
- शैल अग्रवाल