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Saturday, July 15, 2017

सफल आदमी.......भास्कर चौधुरी

यह औरत ही है
जो घर को सम्हाल कर रखती है
कहा उसने
यह औरत ही है
जो आदमी को उसकी मंजिल तक पहुँचाती है
कहा उसने
और
सामाने बैठी औरतों की
ज़ोरदार तालियों के बीच
वह उतर आया
मंच से आहिस्ते आहिस्ते
झूमते झूमते !!


- भास्कर चौधुरी

Wednesday, June 21, 2017

चुप..........भास्कर चौधुरी









पिता के पिता ने कहा
पिता से
चोप्प
दुबक गए पिता
किताबों की अलमारी के पीछे

पिता ने मुझसे कहा
चुप
मैंने दरवाजा खोला
बाहर निकल गया घर से
और  बाहर ही रहा
खाने के वक्त तक
घूमता रहा इधर-उधर
बेमतलब

मैंने बेटी से कहा
चुप्प
उसने पलट कर जवाब दिया !!
-भास्कर चौधुरी