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Saturday, April 21, 2018

लघु कविताएँ ; ‘एक काफिला नन्हीं नौकाओं का’.....डॉ. सुधा गुप्ता

‘एक काफिला नन्हीं नौकाओं का’.....

1- सिर्फ़ एक धुन
उदासी में डूबी सुबह
उदासी में भीगी शाम
उदासी का जाम 
जिन्दगी की बाँसुरी पर 
सिर्फ़ एक धुन 
बजती हैं –
एSS क तेरा नाम ।
-0-
2- तपिश और आग 
दिल के आतिशदान में
चटख़ती यादों ! 
तपिश तो ठीक है, सही जाएगी 
उफ़ ! आग ऐसी ।
मत बनो बेरहम इतनी
मेरी दुनिया जल ही जाएगी !
-0-
3-दो पल में 
कहाँ- कहाँ हो आया मन
दो पला में
क्या- क्या पाया
खो आया मन 
दो पल में …
-0-
4- इंतज़ार 
इंतज़ार 
इंतज़ार ---
पलकों पर काँपते 
आँसुओं की बन्दनवार 
कि / पुतली की रोशनी में
झिलमिलाते /दीयों की क़तार ----
-0-
5-दस्तक
स्वीटपीज़ की गंध 
धीमे – धीमे/ हवा पर बैठ 
सरसराती/ आती हैं 
कोई महक भरी याद 
हौले –हौले 
मेरे दिल का दरवाज़ा 
थपथपाती हैं –
न, नहीं खोलूँगी !
-0-
6-फाँस 
बदल गया मौसम 
फूल गए
अमलतास 
करक गई / ज़ोर से 
फिर कोई फाँस…
-0-
7-चोट 
सुबह-सवेरे
कोयल बोली / कहाँ पी का गाँव
मौसम-बहेलिया 
मँजे खिलाड़ी-सा
फेंक गया दाँव 
टप से गिरी मैं 
चोट खाई चिड़िया-सी 
बाज़ी फिर
उसके हाथ रहेगी !!
-0-
8-मृग- जल 
हौले –से 
तुमने/ तपता मेरा हाथ 
छुआ, और पूछा -
‘अब कैसी हो?’
----झपकी आई थी !
-0-
9-सान्त्वना
फूल
मुझे बहलाने आए—
मेरे पास बैठ कर
हिचकी भर-भर 
रोने लगे …
-0-
10- सिसकी 
बहुत देर रो –रो कर
हलकान हो-हो कर 
सो जाए/ कोई बच्चा
काँधे लग कर 
तो/ नींद में 
जैसे बार- बार 
उसे सिस की आती है,
ऐसे 
मुझे तेरी याद आती है…।
-0-
11-बुज़दिल
दहकती टहनियाँ 
गुलमौर की 
‘आग किसने लगाई’ 
फुस फुसाया जा रहा है,
सवाल
जंगल में कई दिन से 
बुझाने
कोई आगे नहीं आता ।
-0-
12- औचक ही
गुज़रे सबेरों की 
किताब
का कोई पन्ना खुल गया
जनवरी की अलस्सुबह
ठण्डे पानी से नहा कर 
निकलने पर 
पूरी रफ्तार से / चलते
छत-पंखे के नीचे 
औचक ही 
आ गया तन –मन…
-0-
13-मिट्टी का दिया
मैं / मिट्टी का दीया
बड़ी मेहरबानी!
इस दीवाली
तुमने जला दिया
और / यूँ / अपना
जश्न मना लिया …
-डॉ. सुधा गुप्ता