जाम कब्ज़ों में फँसे अंधे किवाड़
देख संजय, खिड़कियों के पार क्या है॥
सात किरणों की लगामें सूर्य पर थी
और उत्तरों में फँसी कुंती बेचारी॥
वो कौन था जिसने कर्ण को लांछित किया
अरे सूर्य ही तो स्रोत है सृष्टि का सारी॥
इस धरा पर ताप बिन कोई जिया क्या
फिर कहो उन पांडवों का दोष क्या था॥
धर्म रक्षा में हुई संतान-क्षतियाँ
पर कुंतियों, गंधारियों का दोष क्या था॥
जिनका, धर्म से, संदर्भ से, पौरुष बढ़ा है
उन मनुजों, अज्ञानियों का पार क्या है॥
-आशीष "वैरागी"
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