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Thursday, October 31, 2019

लिख रहे हैं आप मानवता पर...यशोदा अग्रवाल

लिख रहे हैं आप
मानवता पर
लिखिए
जी चाहे
जितना हो
स्याही कलम में
खतम हो जाए 
तो और भर लो
कलम को सियाही से
सोचकर जितना
अच्छा लिखना हो
लिख डाले..और
करते रहो
प्रतीक्षा...
उसी मानवता की
जिसकी बाट आप
जोह रहे हैं
आनेवाली हर गाड़ी
देख लो...सब आएँगे
पर......मानवता
जिसकी तुम्हें प्रतीक्षा है
वो तो कबकी
निवाला बन चुकी है
आराम फरमा रही है
पेट में...
नेताओं और आतंकियों
के....पर
हजम नहीं हुई अब तक

लेखिका परिचय -यशोदा अग्रवाल 

Friday, August 16, 2019

समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में...यशोदा अग्रवाल

क्या है...
ये कविता..
क्यों लिखते हैं....
झांकिए भीतर
अपने जिन्दगी के
नजर आएगी  एक
प्यारी सी कविता
सुनिए ज़रा
ध्यान से...
क्या गा रही है 
ये कविता....
देखिए इस नन्हें बालक
की मुस्कुराहट को
नज़र आएगी एक
प्यारी सी
मुस्काती कविता....
दिखने वाली
सभी कविताएँ
जिनमें..
हर्ष है और
विषाद भी है
सर्जक है
विध्वंसक भी है
इसमे संयोग है...
और वियोग भी है
है पाप भी 
और प्रेम का
प्रदर्शन का
संगम है
समाई हुई हैं
इसी जिन्दगी में
ये प्यारी सी 
कविता...!!

लेखिका परिचय - यशोदा अग्रवाल 

Monday, July 22, 2019

कहाँ से आएगी माँ....यशोदा अग्रवाल


सोनोग्राफी क्लिनिक के अन्दर
एक महिला ने
थरथराते होठों से
एकान्त में..कहा
घर वाले मेरा ..
करवाना चाहते हैं
परीक्षण
जानना चाहते वे
लड़का है या फिर लड़की
अन्तरात्मा मेरी
धिक्कारती है मुझको
मैडम आप ही 
कोई दीजिए सुझाव
कह दीजिए आप
अगर 
आपने यह परीक्षण करवाया
तो प्रसव मैं नही करवा सकती..
हाँ,"मैडम ने कहा"
वैसे भी गलत भी 
हो जाते हैं कई टेस्ट 
सौ प्रतिशत 
कोई नहीं बता सकता
फिर मैडम ने कहा
क्यों नही चाहती आप??
क्या नहीं चाहिए बेटा??
लड़की तो हैं न एक फिर
ये खतरा क्यूँ...
वो महिला बोल पड़ी....
खतरा...
हाँ लड़की जन्मना 
खतरा ही तो है
पर,मैडम जी जब
एक माँ ऐसा सोचने लगे
तो फिर माँ कौन बनेगा
ये सृष्टि कैसे चलेगी???