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Friday, February 12, 2021

मै भारत-भूमि ! ...मंजू मिश्रा

मै भारत-भूमि !
ना जाने कब से
ढूंढ रही हूँ
अपने हिस्से की
रोशनी का टुकड़ा….
लेकिन पता नहीं क्यो
भ्रष्ट अवव्यस्था के ये अँधेरे
इतने गहरे हैं
कि फ़िर फ़िर टकरा जाती हूँ
अंधी गुफा की दीवारों से…
बाहर निकल ही नहीं पाती
इन जंजीरों से,
जिसमे मुझे जकड़ कर रखा है
मेरी ही संतानों ने

उन संतानों ने
जिनके पूर्वजों ने
लगा दी थी
जान की बाज़ी
मेरी आत्मा को
विदेशियों की चंगुल से
मुक्त कराने के लिए

हँसते हँसते
खेल गए जान पर
शहीद हो गये
माँ की आन पर
एक वो थे
जिनके लिए
देश सब कुछ था
देश की आजादी
सबसे बड़ी थी
एक ये हैं
जिनके लिए
देश कुछ भी नहीं
देश का मान सम्मान
कुछ भी नहीं
बस कुछ है तो
अपना स्वार्थ,
अपनी सम्पन्नता और
अपनी सत्ता ……

-मंजू मिश्रा


Tuesday, January 17, 2017

आंसुओं का बोझ..........मंजू मिश्रा


देखो...
तुम रोना मत 
मेरे घर की  दीवारें
कच्ची हैं 
तुम्हारे आंसुओं का बोझ 
ये सह नहीं पाएंगी 
-:-
वो तो
महलों की दीवारें होती हैं 
जो न जाने कैसे
अपने अंदर 
इतनी सिसकियाँ
समेटे रहती हैं और 
फिर भी
सर ऊंचा करके
खड़ी रहती हैं