
यकीन मानिए
मैं बाजार नहीं गया था
मैं बाजार नहीं गया था
वरन् बाजार मेरे घर घुस गया
उसने बेचा मुझे बहुत कुछ
गैर-ज़रूरी
और ले गया
फ़ाख्ते
हरी घास
फुदकती गिलहरी
टिटहरी का आवाज
बगुलों का झुण्ड
फेरी वालों की पुकार
और बहुत कुछ...
कहते हैं सौदे में हमेशा
बाजार कमाता है
बाजार कमाता है
-नवीन कानगो
