Monday, July 29, 2013

तेरी यादों से दिल बहला रहा हूँ............अरुन शर्मा 'अनन्त'

 
जिसे अपना बनाए जा रहा हूँ,
उसी से चोट दिल पे खा रहा हूँ,

यकीं मुझपे करेगी या नहीं वो,
अभी मैं आजमाया जा रहा हूँ,

मुहब्बत में जखम तो लाजमी है,
दिवाने दिल को ये समझा रहा हूँ,

अकेला रात की बाँहों में छुपकर,
निगाहों की नमी छलका रहा हूँ,

जुदाई की घडी में आज कल मैं,
तेरी यादों से दिल बहला रहा हूँ..

--अरुन शर्मा 'अनन्त'



ओपन बुक्स ऑनलाईन के 
लाइव तरही मुशायरा अंक - ३७ वें में प्रस्तुत "अरुन शर्मा 'अनन्त'" की ग़ज़ल
(बह्र: बहरे हज़ज़ मुसद्दस महजूफ)

12 comments:

  1. आदरणीया यशोदा दी आपने ग़ज़ल को मेरी धरोहर पर साझा करके जो मान दिया है, उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है कहूँ तो क्या कहूँ अनेक अनेक धन्यवाद आशीष एवं स्नेह यूँ ही बनाये रखिये.

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  2. last kuch lines bahut bahut acchi lagi...vaise puri gazal hi dil ko chune wali hai

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  3. बेहतरीन गज़ल !!

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  4. सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

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  5. वाह,,,बहुत खूब बहुत सुंदर गजल ,,,अरुन जी,,,मजा आ गया,,

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  6. सुन्दर प्रस्तुति ....!!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (30-07-2013) को में” "शम्मा सारी रात जली" (चर्चा मंच-अंकः1322) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. सुन्दर प्रस्तुति ....

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  8. वाह , बहुत खूब , उम्दा गजल लिखी अरुण भाई ने

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  9. अकेला रात की बाँहों में छुपकर,
    निगाहों की नमी छलका रहा हूँ,

    जुदाई की घडी में आज कल मैं,
    तेरी यादों से दिल बहला रहा हूँ.--बहुत खूब, बहुत सुंदर गजल!
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  10. प्रेम के दर्द को बहुत ही सरलता से व्यक्त किया है...
    बहुत ही बेहतरीन मनभावन रचना...
    :-)

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