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Monday, May 15, 2017

सारा मकां सोया पड़ा है.....आबिद आलमी


वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है,
मंज़िलों को ग़म उन्हीं को खा रहा है

मेरा दिल है देखने की चीज़ लेकिन
इस को छूना मत कि यह टूटा हुआ है

अजनबी बन कर वो मिलता है उन्हीं से
जिन को वो अच्छी तरह पहचानता है

चीखती थी ईंट एक इक जिसकी कल तक
आज वो सारा मकां सोया पड़ा है

क्या अलामत है किसी क़ब्ज़े की 'आबिद'
ये जो मेरे घर पे कुछ लिखा हुआ है
रामनाथ चसवाल (आबिद आलमी)

श्री राम नाथ चसवाल को 
उर्दू साहित्य में 
'आबिद आलमी' के नाम से जाना जाता है।