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Tuesday, April 17, 2018

कदम मिलाकर चलना होगा.....अटल बिहारी बाजपेयी

बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पांवों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों से हंसते-हंसते,
आग लगाकर जलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

हास्य-रुदन में, तूफानों में,
अमर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,
अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,
पीड़ाओं में पलना होगा!

कदम मिलाकर चलना होगा।

उजियारे में, अंधकार में,
कल कछार में, बीच धार में,

घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,

जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को दलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अमर ध्‍येय पथ,
प्रगति चिरन्तन कैसा इति अथ,

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,
असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ न मांगते,
पावस बनकर ढलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

कुश कांटों से सज्जित जीवन,
प्रखर प्यार से वञ्चित यौवन,

नीरवता से मुखरित मधुवन,
पर-ह‍ति अर्पित अपना तन-मन,

जीवन को शत-शत आहुति में,
जलना होगा, गलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।
-अटल बिहारी बाजपेयी

Monday, December 22, 2014

‘‘न दैन्यं न पलायनम्।’’ ......................अटल बिहारी वाजपेयी













कर्तव्य के पुनीत पथ को
हमने स्वेद से सींचा है,
कभी-कभी अपने अश्रु और—
प्राणों का अर्ध्य भी दिया है।

किंतु, अपनी ध्येय-यात्रा में—
हम कभी रुके नहीं हैं।
किसी चुनौती के सम्मुख
कभी झुके नहीं हैं।

आज,
जब कि राष्ट्र-जीवन की
समस्त निधियाँ,
दाँव पर लगी हैं,
और,
एक घनीभूत अंधेरा—
हमारे जीवन के
सारे आलोक को
निगल लेना चाहता है;

हमें ध्येय के लिए
जीने, जूझने और
आवश्यकता पड़ने पर—
मरने के संकल्प को दोहराना है।

आग्नेय परीक्षा की
इस घड़ी में—
आइए, अर्जुन की तरह
उद्घोष करें :
‘‘न दैन्यं न पलायनम्।’’ 


-अटल बिहारी वाजपेयी


 प्राप्ति स्रोतः रसरंग

माननीय अटल बिहारी वाजपेयी
(पूर्व प्रधान मंत्री, कवि) 

जन्मः 25 दिसम्बर 1926
ग्वालियर, मध्य प्रदेश
प्रमुख कृतियाँ
मेरी इंक्यावन कविताएँ, न दैन्यं न पलायनम्, 
मृत्यु और हत्या, अमर बलिदान.
भाषाः हिन्दी 


Monday, July 21, 2014

सपना टूट गया.....अटल बिहारी बाजपेयी

हाथों का हल्दी है पीली
पैरों की मेहंदी है कुछ गीली
पलक झपकने के पहले ही
सपना टूट गया

दीप बुझाया रची दिवाली
लेकिन कटी न अमावस काली
व्यर्थ हुआ आह्वान, स्वर्ण सवेरा रूठ गया
सपना टूट गया

नियति नटी की लीला न्यारी
सब कुछ स्वाही की तैयारी
अभी चला दो कदम कारवां,साथी छूट गया
सपना टूट गया

अटल बिहारी बाजपेयी
जन्मः 25,दिसम्बर,1924, ग्वालियर, मध्यप्रदेश
स्रोतः रसरंग