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Monday, December 24, 2018

हाइकु गुलशन...अशोक बाबू माहौर

सड़क चौड़ी 
ऊबड़ खाबड़ है 
पथ दुर्गम। 

आँखें कजरी 
गाल लालिमा से हैं 
होंठ गुलाबी। 

पानी बहता 
नदी उफान भरी 
बारिश तेज़ । 

चादर फटी 
ठण्ड आफत लाती 
ओढ़ता कौन। 
-अशोकबाबू माहौर