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Sunday, January 20, 2019

शायद वो आ गए हैं ...दानिश भारती


परखेगा ये ज़माना 
धोखे में आ न जाना 
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दिलचस्प तज्रबा है 
दुनिया से दिल लगाना 
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'हाँ ' भी छिपी थी उसमें 
जब उसने कह दिया 'ना'
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साक़ी का हुक्म है ये 
पीना , न डगमगाना 
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सब लोग याद रक्खें 
ऐसा कहो फ़साना 
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मेरी - - वही गुज़ारिश 
उसका - - वही बहाना 
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समझो तो क़ीमत इसकी 
है ज़िन्दगी खज़ाना 
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शायद वो आ गए हैं 
मौसम हुआ सुहाना 
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रास आ रहा है "दानिश" 
लफ़्ज़ों को गुनगुनाना 
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-दानिश