परखेगा ये ज़माना
धोखे में आ न जाना
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दिलचस्प तज्रबा है
दुनिया से दिल लगाना
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'हाँ ' भी छिपी थी उसमें
जब उसने कह दिया 'ना'
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साक़ी का हुक्म है ये
पीना , न डगमगाना
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सब लोग याद रक्खें
ऐसा कहो फ़साना
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मेरी - - वही गुज़ारिश
उसका - - वही बहाना
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समझो तो क़ीमत इसकी
है ज़िन्दगी खज़ाना
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शायद वो आ गए हैं
मौसम हुआ सुहाना
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रास आ रहा है "दानिश"
लफ़्ज़ों को गुनगुनाना
-दानिश
