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Friday, January 15, 2016

सोलह की उम्र खास मिली......जहीर कुरैशी


जवान होने की सीमा के आसपास मिली 
किशोर वय मे भी,सोलह की उम्र खास मिली..

खुशी के बाद नज़र आई सारी दुनिया खुश
उदास होते ही दुनिया बहुत उदास मिली

हटा कर राख अगन को जगाना पड़ता है
हताश लोगों के मन में भी कोई आस मिली

वो जिसने किया बाध्य चाकरी के लिए
हरिक मनुष्य की काया में भूख प्यास मिली

विकल समुद्र से मिलने चल पड़ी नदियां
समुद्र होने की चाहत नदी के पास मिली

उन्हीं के स्वप्न का सूरज कभी नहीं डूबा
वो जिनके सपने के अन्दर बहुत उजास मिली

-जहीर कुरैशी

Thursday, January 14, 2016

समझ नही पाता है इंसान...विमल गांधी


समझ नहीं पाता है इंसान। 
कभी - कभी.....
जिंदगी दिखाती है रास्ते बहुत॥

खड़ी करती है सवाल बहुत।
किस राह जाऊँ किस राह नही जाऊँ॥

कर देती है बैचेन बहुत।
क्या करूँ क्या नहीं करूँ॥

समझ नही पाता है इंसान।
जिंदगी दुविधा में फँस जाती है॥

फ़ैसला करना मुश्किल हो जाता है कि...
किस दिशा जाऊँ किस दिशा नही जाऊँ॥

उस समय सिर्फ याद आती है 
उस रब की...कि वो ही कोई राह दिखाये 
जिस पर हम खुशी-खुशी जाये॥

©विमल गांधी



“विमल गांधी जी” की कवितओं का 
हर एक शब्द में अलौकिक सार भरा हैं। 
जो हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। 
कविताऐं छोटी और सरल शब्दों में होते हुए भी हृदयसात करने योग्य हैं। 
जो भी इंसान इन कविताओं को गहराई (हर शब्दों का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हो जायें।

Saturday, August 2, 2014

खुशी के चार रंग............यशोदा









 















खुशी के
कई रंग होते हैं...
कोई...
दूसरों की
मदद करके खुश होता है
तो कोई..
अपनों को गले लगाकर
खुशी का
कोई पैमाना नहीं
और जिन्दगी को
खूबसूरत बनाने का
इससे अच्छा कोई
विकल्प भी नहीं
...............
वर्तमान की
खुशियों का
आनन्द उठाइये
ताकि...
आने वाली
खुशियों को
आघात न पहुंचे
...........
कभी-कभी
आपकी खुशी
आपके मुस्कुराहट
का राज होती है
लेकिन...
कभी-कभी
आपकी मुस्कुराहट भी
आपकी खुशी
का राज हो सकती है
.........
दुनिया के
दुःखों में भी
खुशी से भाग लें,
हम दुनिया को
दुःखों से
मुक्त...
तो नहीं कर सकते
लेकिन...
खुशी से जीने का
निर्णय..
तो कर ही सकते हैं
........
मन की उपज
-यशोदा