उड़ते - उड़ते एक दिन,
जा बैठूं किसी मुंडेर पर...
खिलखिलाती हो हंसी जहाँ,
हों खुशियां छोटी - छोटी।
प्यार करें इक - दूजे से सब,
मिलजुल कर खाएं रोटी।
उड़ते - उड़ते एक दिन,
जा बैठूं किसी मुंडेर पर...
न हो शोर - शराबा जहाँ,
बस सुने मधुर संगीत।
एक - दूसरे संग मिलकर,
करें सब समय व्यतीत।
उड़ने का हो समय,
मन करे बैठूं वहीं कुछ देर, पर।
अगले दिन फिर यूं ही,
जा बैठूं उसी मुंडेर पर।
उड़ते - उड़ते एक दिन..

-मनीष वर्मा
