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Monday, May 18, 2020

भींगी पलकें ....पूनम सिन्हा

बुझी नजरें ना चुरा,मुझे अपना गम तो बता,
भींगी पलकें ना झुका,मुझे तेरा हाल है पता।

मैं सारी दुनियां से लड़ जाऊँगा सनम तेरे लिए,
मैं तो हद से भी गुजर जाऊँगा सनम तेरे लिए।

मैं अपना आशियाना बनाऊँगा तेरे पलकों के तले,
अब जीऊँगा और मरूँगा तेरे पलकों के तले।

तूँ जो पलकें उठाती है तो मेरी सुबह होती है ,
तूँ जो पलकें झुकाती है तो मेरी शाम ढलती है।

तेरी पलकों के तले मेरे अरमान पलते हैं,
तेरी पलकों के तलेउम्मीदों के दीप जलते हैं।

तेरी भींगी हुई पलकें मुझे झकझोर देती हैं,
तेरी भींगी हुई पलकें क्यूँ दिल को तोड़ देती हैं।

भींगी पलकें ना झुकाओ मेरी धड़कन ना थम जाए,
भींगी पलकें ना झुकाओ मेरी साँसे ना रूक जाए।

लाऊँगा सनम तुझको मैं तुझसे ही चुरा के,
रखूँगा सनम तुझको सदा पलकों पे बिठा के।
-पूनम सिन्हा
देवघर,झारखंड।

Thursday, June 13, 2019

गूंजती है आवाज कानों में मेरी.... पूनम सिन्हा


रद़ीफ - है मुझे
क़ाफ़िया - ता(आ)

बड़ी सिद्दत से कोई चाहता है मुझे,
मुझसे भी अधिक वो जानता है मुझे।

गूंजती है आवाज कानों में मेरी,
दूर पहाड़ों से कोई पुकारता है मुझे।

मंदिरों में भी घंटे बजाता है हरदम,
जाके रब से सदा माँगता है मुझे।

खुली खिड़कियां जो कभी मेरे घर की,
छुप के पेड़ों से फिर झांकता है मुझे।

प्यार करता हूँ मैं सदियों से तुझे,
अपनी हरकतों से ये जताता है मुझे।

बड़ा मजबूर हूँ मैं, गमों से चूर हूँ मैं,
बहते हुए अश्कों से ये बताता है मुझे।

तड़प उठती हूँ मैं जब भी देखूँ उसे,
क्या है रिश्ता उससे जो सताता है मुझे।

स्वरचित,
-पूनम सिन्हा,
धनबाद,झारखंड।