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Saturday, March 3, 2018

थोड़ी नमी तो लाज़मी है.....मनी यादव

वो गया  है  बेदिली  तो लाज़मी  है
आँसुओं से दोस्ती तो लाज़मी है

धूप सूरज से बग़ावत कर रही है
इश्क़ में आवारगी तो लाज़मी है

उस नज़र में देखा ख़ुद को मुद्दतों बाद
आँख में थोड़ी नमी तो लाज़मी है

याँ अदब की सब चितायें जल चुकी हैं
सल्तनत में तीरगी तो लाज़मी है
-मनी यादव

Monday, July 24, 2017

आग, पानी और प्यास....प्रेम नंदन









जब भी लगती है उन्हें प्यास
वे लिखते हैं
खुरदुरे कागज के चिकने चेहरे पर
कुछ बूँद पानी
और धधकने लगती है आग !
इसी आग की आँच से
बुझा लेते हैं वे
अपनी हर तरह की प्यास !
मदारियों के
आधुनिक संस्करण हैं वे
आग और पानी को
कागज में बाँधकर
जेब में रखना
जानते हैं वे!
- प्रेम नंदन
संपर्क – 
उत्तरी शकुन नगर, 
सिविल लाइन्स, 
फतेहपुर, (उ०प्र०)|
मोबाइल – 09336453835
ईमेल - premnandan10@gmail.com

Tuesday, May 9, 2017

खुशबू दिलदार से चुरायी है....मनी यादव

चित्र गूगल से
ख़ुशबू तेरी पयाम लायी है
फिर फ़िज़ा में बहार आयी है

बेवफ़ा मैं नहीं, न ही तुम हो
फ़ितरते इश्क़ बेवफ़ाई है

इत्र चुपके से कान में बोला
खुशबू दिलदार से चुरायी है

कोई मंज़र नहीं रहा ग़म का
आज शायद वो मुस्करायी है

पहना ज्यों ही लिबास यादों का
खुद ग़ज़ल मेरे पास आई है
- मनी यादव 

Friday, March 31, 2017

वो सफ़र बाकी है.....मनी यादव


तेरी यादों का अभी दिल पर असर बाकी है
जो करेंगे साथ में तय वो सफ़र बाकी है

यूँ तो अश्क़ों से मुकम्मल हो चुका है दरिया
फिर भी दरिया में मुहब्बत की लहर बाकी है

कुछ तो डर खुद से या मौला से तू आदम
तेरा तुझ पर ही अभी बदतर क़हर बाकी है

तीरगी दिखती रही तुझमे 'मनी' दुनिया को
कुछ बता तुझमे उजाला किस कदर बाकी है