Monday, July 22, 2013

अपनी बेईमानी भूल मत जाना ...........सचिन अग्रवाल





नए मौसम में सब बातें पुरानी भूल मत जाना
कई आँखों में जो उबला है पानी, भूल मत जाना

अदावत मरते दम तक है निभानी, भूल मत जाना
रिवायत है हमारी खानदानी, भूल मत जाना

चिता तो जल के कुछ ही देर में बुझ भी गयी लेकिन
किसी की मर गयी बेटी सयानी, भूल मत जाना

ये ज़ुल्मत और ये चीखें कभी बेशक़ न याद आयें
मगर इन मुन्सिफों की बेज़ुबानी भूल मत जाना

सियासी आँधियों के सामने जलते दिये लेकर
बहुत बेबस खड़ी थी नौजवानी, भूल मत जाना

तमाशा बन चुके जम्हूरियत के नूर की खातिर
जो हमने मुद्दतों तक खाक़ छानी, भूल मत जाना

रखेंगे याद हम तो हादसों को जीते जी अपने
कि रहबर तू भी अपनी बेईमानी भूल मत जाना

शुभकामनाओं सहित
सचिन अग्रवाल

4 comments:

  1. कुल करनी के कारनै, हंसा गया बिगोय ।
    तब कुल का को लाजि है, चारि पाँव का होय ।।
    ----- ।। कबीर ।। -----

    भावार्थ : -- कुल अर्थात खानदान की करनी के कारण हंस भी बिगड़ जाता है, अर्थात उत्तम जाति भी अनुत्तम हो जाती है । तब उस कुल का क्या मान -मर्यादा रही, जब वह और बिगड़ कर चार पाँव का जंतु हो गया ।।

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  2. कब का भूल गए
    चौथे तक
    बस चार दिन याद रहता है
    नवीन अनुभूति के लिए सब तैयार हैं
    हार्दिक शुभकामनायें .....

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  3. अदावत मरते दम तक है निभानी, भूल मत जाना
    रिवायत है हमारी खानदानी, भूल मत जाना

    हुस्न ए मतला , वाह बहुत सुंदर भाव पूर्ण गजल है, शुभकामनाये


    यहाँ भी पधारे
    गुरु को समर्पित
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_22.html

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