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Wednesday, December 13, 2017

मौत का मंतर न फेंक....डॉ. कुंवर बेचैन


दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक
चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न फेंक

हो सके तो चल किसी की आरजू के साथ-साथ
मुस्कराती ज़िंदगी पर मौत का मंतर न फेंक

जो धरा से कर रही है कम गगन का फासला
उन उड़ानों पर अंधेरी आँधियों का डर न फेंक

फेंकने ही हैं अगर पत्थर तो पानी पर उछाल
तैरती मछली, मचलती नाव पर पत्थर न फेंक

-डॉ. कुंवर बेचैन

Monday, September 9, 2013

मुहब्बत, तेरी खुशबू, चांदनी है, जाफरानी है...........डॉ. कुंवर बेचैन


न तो किरदार है कोई न राजा है न रानी है
मैं इक कोरा-सा कागज हूँ अजब मेरी कहनी है

मुहब्बत करने वाले,प्यार को दिल में रखे रखना
ख़ुदा ने जो  हमे बख़्शी है ये ऐसी निशानी है

जो दिन में चांद बनकर चांदनी देती रही मुझको
मुहब्बत, तेरी खुशबू, चांदनी है, जाफरानी है

घिरी है अब भी लपटों में, दिखाई कुछ नहीं देता
ये मेरी जिन्दगी है या धुंएँ की राजधानी है

शुरू से अंत तक कहती रही दुनियां में रहने दो
मगर कब मौत ने इस जिन्दगी की बात मानी है

नहीं तो कुछ दिनों में वो भी रेगिस्तान बन जाती
ये अच्छा ही हुआ अब तक मेरी आँखों में पानी है

अभी कर जिसके मैंनें अपनी आँखो से नहीं देखा
' कुंवर' मैंनें उसी के साथ मर-मिटने की ठानी है

-डॉ. कुंवर बेचैन
 
 

Sunday, September 8, 2013

रानी तक गर है राजा की, राजा तक रानी की हद....डॉ. कुंवर बेचैन



आंधी तक है तेज हवा की, बाढ़ों तक पानी की हद
पर राजाओं ने कब तय की, अपनी मनमानी की हद

मेहमानों का आदर करना,अच्छा है लेकिन यारों
मेहमां घर को ही ले बैठे. ये है मेहमानी की हद

याचक जो भी चाहे, उसके क्या वो ही दे देंगे हम
दानी से कहियेगा, कुछ तो होती है दानी की हद

सैलानी बनकर आए हो, क्या तुमको मालूम नहीं
औरों के घर में होती है, कुछ तो सैलानी की हद

ये तो है अन्याय, कि महलों को तो पूरी छूट मिले
और इधर तय कर दी जाए, हर छप्पर-छानी की हद

उत्तर में वो यह कह देंगे, अपनी सीमा कोई नहीं
परधानों से पूछ के देखो, उनकी परधानी की हद

उसके आगे खुशियां भी होंगी, मुझके मालूम नहीं
बस यह जाना, चिंता तक है, मेरी पेशानी की हद

हम तो अन्न उगाकर भी भूखे हैं, अब तुम बतलाओ
कुछ तो होगी, यार तुम्हारी भी तो हैरानी की हद

उसके बाद तो, कड़वाहट ही कड़वाहट है जीवन में
शायद बचपन तक ही है, ये मीठी गुड़धानी की हद

उसके राज में, जनता तो भूखी-प्यासी मरनी ही है
रानी तक गर है राजा की, राजा तक रानी की हद

डॉ. कुंवर बेचैन
जन्मः 01 जुलाई 1942, मुरादाबाद उ.प्र.
सौजन्यः रसरंग, दैनिक भास्कर