Wednesday, July 24, 2013

शरारत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे.....मनीष गुप्ता



यूँ ना इस अंदाज़ में हमको देखा करो
मुहब्बत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

ये शोख अदाएं अक्सर बहकाती हैं दिल को
शरारत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

इन निगाहों में घर बसा लो हसीन ख्याबों के
कयामत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

सुना है बहुत नाज़ुक दिल रखते हैं आप
इनायत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

बड़ा हुजूम है इश्क़ के मारों का आपके शहर में
बगावत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

बहुत बेताब है वस्ले शब की तमन्ना दिल में
मुखातिब हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

कभी लगती है खुदाया सी आपकी नवाजिशें
इबादत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

--मनीष गुप्ता

10 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर

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  2. इन निगाहों में घर बसा लो हसीन ख्याबों के
    कयामत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे ..

    खूबसूरत अंदाज़ है हसीन सा ... लाजवाब शेर ...

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  3. ग़ज़ल के साथ पूरा सामंजस्य बिठाती तस्वीर में निगाहें;-))
    बहुत सुन्दर...सच में डर लग रहा है कहीं मुहब्बत नं हो जाए....मनीषा जी, आपको हार्दिक मोहब्बतमय बधाई...

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