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Thursday, March 28, 2019

कोई गीत गाए तो कैसे ?....डॉ. अनिल चड्डा

अधरों पर
तुम्हारे प्यार के कुहासे छाए हैं
कोई मुस्कराए तो कैसे ?

जीवन का हर क्षण
तुम्हारा नाम गुनगुनाए है
कोई मर जाए तो कैसे ?

कलियों औ' भौरों की
गुपचुप से मन शर्माए है
कोई कुछ बतलाए तो कैसे ?

उनके कदमों की आहट पर
हमने कान लगाए हैं
कोई छिप जाए तो कैसे ?

रीता मन
हरदम उन्हें अपने पास बुलाए है
कोई गीत गाए तो कैसे ?
- डॉ. अनिल चड्डा

Thursday, November 2, 2017

हर शख्स अंधा हो रहा है............डॉ. अनिल चड्डा

ज़माने में धुँआ कैसा हुआ है,
यहाँ हर शख्स अंधा हो रहा है।

दुआ कोई नहीं है काम करती,
समय ने घात सब से ही किया है!

सवालों को घुमाये जो हमेशा,
नहीं आता उसे करना वफ़ा है! 

अदायें अब नहीं हमको लुभाती,
जफाओं ने यही हमको दिया है!

‘अनिल’ जैसे कई बैठे हैं तन्हा,
ज़माने में यही होता रहा है!
-डॉ. अनिल चड्डा