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Sunday, January 26, 2020

अक्सर खामोश लम्हों में....मीना भारद्वाज


अक्सर खामोश लम्हों में
किताबें भंग करती हैं
मेरे मन की चुप्पी…
खिड़की से आती हवा के साथ
पन्नों की सरसराहट
बनती है अभिन्न संगी…
पन्नों से झांकते शब्द
सुलझाते हैं मन की गुत्थियां
शब्द शब्द झरता है पन्नों से
हरसिंगार के फूल सा…
नीलगगन में चाँद
बादलों की ओट से झांकता
धूसर सा लगता है…
कशमकश के लम्हों में
एक खामोश सी नज़्म
साकार हो उठती है अहसासों में
बस उसी पल…
प्रभाकर की अनुपस्थिति में
पूर्णाभा के साथ
मन आंगन में..सात रंगों वाला…
इन्द्र धनुष खिल उठता है !!


लेखिका परिचय- मीना भारद्वाज 

Tuesday, September 24, 2019

कैसे कैसे रंग बदलता आदमी....मीना भारद्वाज

कैसे कैसे रंग बदलता आदमी ।
वक्त के साथ ढलता आदमी ।।

परिवर्तन में ये तो इतना माहिर ।
गिरगिट से होड़ करता आदमी ।।

स्याह रंग की पहनता पैहरन  ।
फिर भी उजली कहता आदमी ।।

आगे बढ़ने की होड़ मे देखो ।
अपनों पे पैर रखता  आदमी ।।

आश्रित सदा अमरबेल सा ।
खुद को बरगद समझता आदमी !!


-- मीना भारद्वाज 

Wednesday, August 14, 2019

मौन रह कर मैं मुखर होना सीख रही हूँ....मीना भारद्वाज

मौन रह कर मैं ,
मुखर होना सीख रही हूँ ।
समझदारी के बटखरों से ,

 शब्दों का  वजन ।
मैं भी आज कल ,
तौलना सीख रही हूँ ।
रिक्त से कैनवास पर ,

इन्द्रधनुषी सी कोई तस्वीर ।
बिना रंगों की पहचान ,
उकेरना सीख रही हूँ ।
घनी सी उलझन की ,

उलझी सी गाँठों को ।
मन की अंगुलियों से ,
खोलना सीख रही हूँ ।
भ्रमित हूँ , चकित हूँ ,


दुनिया के ढंग देख कर ।
बन रही हूँ  कुशल ,
नये कौशल सीख रही हूँ ।
भौतिक नश्वरता के दौर में ,
मैं भी आज कल ;
दुनियादारी सीख रही हूँ ।

लेखक परिचय - मीना भारद्वाज 

Sunday, July 7, 2019

"फिक्र".....मीना भारद्वाज

मेरी कुछ यादें और उम्र के अल्हड़ बरस ।
अब भी रचे-बसे होंगें उस छोटे से गाँव में ।।

जिसने ओढ़ रखी है बांस के झुरमुटों की चादर ।
और सिमटा हुआ है ब्रह्मपुत्र की बाहों में ।।

आमों की बौर से लदे सघन कुंजों से ।
      पौ फटते ही कोयल की कुहूक गूँजा करती थी ।।

गर्मी की लूँ सी हवाएँ बांस के झुण्डों से ।
सीटी सी सरगोशी लिए बहा करती थी ।।

हरीतिमा से ढका एक छोटा सा घर ।
मोगरे , चमेली और गुलाबों सा महकता था ।।

अमरूद , आम और घने पेड़ों  के बीच ।
हर दम सोया सोया सा रहता था ।।

बारिशों के मौसम में उसकी फिक्र सी रहने लगी है ।
नाराजगी में नदियाँ गुस्से का इजहार करने लगी हैं ।।


लेखक परिचय - मीना भारद्वाज