Friday, May 31, 2013

सिसकते आब में किस की सदा है......... डॉ. बशीर बद्र

सिसकते आब में किस की सदा है  
कोई दरिया की तह में रो रहा है

सवेरे मेरी इन आँखों ने देखा  
ख़ुदा चारो तरफ़ बिखरा हुआ है

समेटो और सीने में छुपा लो  
ये सन्नाटा बहुत फैला हुआ है

पके गेंहू की ख़ुश्बू चीखती है  
बदन अपना सुनेहरा हो चला है

हक़ीक़त सुर्ख़ मछली जानती है  
समन्दर कैसा बूढ़ा देवता है

हमारी शाख़ का नौ-ख़ेज़ पत्ता  
हवा के होंठ अक्सर चूमता है

मुझे उन नीली आँखों ने बताया  
तुम्हारा नाम पानी पर लिखा है

-डॉ. बशीर बद्र

8 comments:

  1. मुझे उन नीली आँखों ने बताया
    तुम्हारा नाम पानी पर लिखा है
    ------
    बेहतरीन.. उम्दा...

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  2. बहुत उम्दा,लाजबाब प्रस्तुति,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  3. बहुत उम्दा,लाजबाब प्रस्तुति,,आभार यशोदा जी

    आप भी फालो करे तो मुझे हार्दिक खुशी होगी,,,,

    Recent post: ओ प्यारी लली,

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  4. मुझे उन नीली आँखों ने बताया
    तुम्हारा नाम पानी पर लिखा है
    वाह ... बेहतरीन

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  5. बहुत बढ़िया उम्दा प्रस्तुति

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  6. बेहतरीन प्रस्तुति .... वाह

    दो शे'र आपके लिये...

    यारों ने जिस पे अपनी दुकानें सजाई है
    ख़ुश्बू बता रही है हमारी ज़मीन है
    **
    चमकती है कहीं सदियों में आंसुओं से ज़मीं
    ग़ज़ल के शे'र कहाँ रोज़ रोज़ होते हैं

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