Sunday, May 26, 2013

नहीं जानती क्यों....."फाल्गुनी"

 
नहीं जानती क्यों
अचानक सरसराती धूल के साथ
हमारे बीच
भर जाती है आंधियां
और हम शब्दहीन घास से
बस नम खड़े रह जाते हैं

नहीं जानती क्यों
अचानक बह आता है
हमारे बीच
दुखों का खारा पारदर्शी पानी
और हम अपने अपने संमदर की लहरों से उलझते
पास-पास होकर
भीग नहीं पाते...

नहीं जानती क्यों
हमारे बीच महकते सुकोमल गुलाबी फूल
अनकहे तीखे दर्द की मार से झरने लगते हैं और
उन्हें समेटने में मेरे प्रेम से सने ताजा शब्द
अचानक बेमौत मरने लगते हैं..
नहीं जानती क्यों.... 

--स्मृति आदित्य "फाल्गुनी"

22 comments:

  1. बहुत नवीनता लिए रचना

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  2. गजब की अभिव्यक्ति..... प्रस्तुति के लिए आभार!!

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज बृहस्पतिवार (26-05-2013) के "आम फलों का राजा होता : चर्चामंच 1256"
    में मयंक का कोना
    पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. क्षमा करें...पहले कमेट में दिन गलत टाइप हो गया था...!
    --
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज रविवार (26-05-2013) के "आम फलों का राजा होता : चर्चामंच 1256"
    में मयंक का कोना
    पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति यशोदा जी ..... बधाई !

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  6. nav shrijan ke sath nyee tazgi ka ahsash karati sundar prastuti

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  7. हमारे बीच ..??
    बहुत अच्छी रचना

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  8. अनकहे तीखे दर्द की मार से झरने लगते हैं और
    उन्हें समेटने में मेरे प्रेम से सने ताजा शब्द
    अचानक बेमौत मरने लगते हैं..
    नहीं जानती क्यों.... bahut badhiya kuchh baten hamesha unsuljhi hi rah jati hai ....

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  9. हमारे बीच महकते सुकोमल गुलाबी फूल
    अनकहे तीखे दर्द की मार से झरने लगते हैं और
    उन्हें समेटने में मेरे प्रेम से सने ताजा शब्द
    अचानक बेमौत मरने लगते हैं......
    कमेंट करने के लिए मेरे शब्द मन मुताबिक नहीं मिल रहे ........

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  10. बहुत सुन्दर दमदार प्रस्तुति के लिए धन्यवाद ...

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  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.
    अनुशरण कर मेरे ब्लॉग को अनुभव करे मेरी अनुभूति को
    latest post: बादल तू जल्दी आना रे!
    latest postअनुभूति : विविधा

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  12. शुभम
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (27-05-2013) के :चर्चा मंच 1257: पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
    सूचनार्थ |

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  13. नहीं जानती क्यों
    अचानक बह आता है
    हमारे बीच
    दुखों का खारा पारदर्शी पानी
    और हम अपने अपने संमदर की लहरों से उलझते
    पास-पास होकर
    भीग नहीं पाते...-----

    मन को भेदती रचना
    मार्मिक और भावपूर्ण
    बहुत सुंदर
    आभार

    आग्रह हैं पढ़े
    ओ मेरी सुबह--
    http://jyoti-khare.blogspot.in

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  14. आपकी यह रचना कल सोमवार (27 -05-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  15. गंभीर रचना .एक ताजगी के अहसास के साथ

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  16. everyone feels this situation, but poet write this feeling with well decorated words... plz visit my blog.

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  17. Great poen on vagaries of life.

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  18. behad ganbhirta se vishy ka chayan aur dsase bhi behatar vicharo ke liye chayanti shabdon ki nakkasi

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  19. भावनापूर्ण अभिव्यक्ति ,बहुत सुंदर .....

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  20. नहीं जानती क्यों
    हमारे बीच महकते सुकोमल गुलाबी फूल
    अनकहे तीखे दर्द की मार से झरने लगते हैं और
    उन्हें समेटने में मेरे प्रेम से सने ताजा शब्द
    अचानक बेमौत मरने लगते हैं..
    नहीं जानती क्यों....
    .......बेहतरीन..........

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