Thursday, March 9, 2017

आँसू............रागिनी शर्मा “स्वर्णकार”





याद बहुत आये थे आँसू
प्यार की कसक भरे वे आँसू
मधुर मधुर उस मधुशाला में
रस से छलक उठे थे आँसू

सरिता से सागर रूठा था
या अवनि से जलधर रूठा था
साथ छोड़ रही थी कश्ती
साहिल का सिसक उठे थे आँसू

प्यार प्यार बस प्यार चाहिए
हर धड़कन पर अधिकार चाहिए
प्रिय की बेरुखी से व्याकुल
होकर हिलक उठे थे आँसू

4 comments:

  1. सरिता से सागर रूठा था
    या अवनि से जलधर रूठा था
    साथ छोड़ रही थी कश्ती
    साहिल का सिसक उठे थे आँसू

    बहुत सुंदर रचना।।।।।

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  2. वाह !!!! बहुत सुंदर ।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति....

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