Tuesday, October 31, 2017

मौसम तो है भीगी भीगी बातों का.....समीना राजा

दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का 
चार तरफ़ संगीत रचा हो झरनों का 

हम ने भी तकलीफ़ उठाई है आख़िर 
आप बुरा क्यूँ मानें सच्ची बातों का 

जाने अब क्यूँ दिल का पंछी है गुम-सुम 
जब पेड़ों पर शोर मचा है चिड़ियों का 

रात गए तक राह वो मेरी देखेगा 
मुझ पर है इक ख़ौफ़ सा तारी राहों का 

मेरे माथे पर कुछ लम्हे उतरे थे 
अब भी याद है ज़ाइक़ा उस के होंटों का 

पूरे चाँद की रात मगर ख़ामोशी है 
मौसम तो है भीगी भीगी बातों का

3 comments:

  1. बहुत अच्छा।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (01-11-2017) को
    गुज़रे थे मेरे दिन भी कुछ माँ की इबादत में ...चर्चामंच 2775
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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