Tuesday, September 4, 2012

आज का दौर.......डॉ. औरीना अब्बासी "अदा"


आज का दौर
आज के इस दौर ने
हर शै को महंगा कर दिया,
कीमतें ऐसी बढ़ी कि
इनसां को सस्ता कर दिया.

हम तो समझे थे कि यादों
का सफर अब थम गया,
रात एक तस्वीर ने यादों को
ताजा कर दिया.

आप की शायद यह ख्वाहिश थी
कि हो मेरी शिकस्त,
लीजिये खुद को हरा कर
उन का अरमान पूरा कर दिया.


-डॉ. औरीना अब्बासी "अदा"

5 comments:

  1. आज के हालत में किस किस से हम बचकर चले
    प्रशं लगता है सरल पर ये बहुत गंभीर है
    चाँद रुपयों की बदौलत बेचकर हर चीज को
    आज हम आबाज देते की बेचना जमीर है

    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    http://madan-saxena.blogspot.in/
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    1. धन्यवाद मदन भाई

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  2. आप की शायद यह ख्वाहिश थी
    कि हो मेरी शिकस्त...
    .........................
    शायद... ऐसा नहीं होता

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  3. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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