Tuesday, September 25, 2012

क्या प्रेम है मुझसे .............नीलू शर्मा



अजनबी नहीं हूँ सनम दिल से तेरे!
बस हाले-दिल जुबां से कहा नहीं करता!!

बसी है दिल में मेरे इबादत की तरह !
बस दर पर तेरे सनम बंदगी नहीं करता !!

बसती है दिल में सनम धड़कन की तरह !
बस साँसो के संग निकला नहीं करता !!

खूबसूरत है इतनी हरदम कहा करता हूँ !
बस किसी से सनम तेरी उपमा नहीं करता !!

देखता हूँ जब तुझे सनम लगती है ग़ज़ल !
शायर हूँ मैं फिर भी तुझ पर ग़ज़ल नहीं करता !!

क्या प्रेम है मुझसे सनम बस एक सवाल तेरा !
बस बंद करता हूँ पलकों को"प्रेम"है कहा नहीं करता !!


--नीलू शर्मा
 

Neelu Sharma 

9 comments:

  1. अलग अंदाज़ में कही गई गजल है .हर अश आर एक अंडर टोन लिए है .
    ram ram bhai
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    मंगलवार, 25 सितम्बर 2012
    दी इनविजिबिल सायलेंट किलर

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  2. क्या प्रेम है मुझसे सनम बस एक सवाल तेरा !
    सवाल को सवाल ही रहने दिया जाए तो ज्यादा मुनासिब
    अच्छी रचना...................

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  3. पोस्ट दिल को छू गयी.......कितने खुबसूरत जज्बात डाल दिए हैं आपने..........बहुत खूब
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  4. अति सुन्दर बधाई

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  5. अति सुन्दर रचना..
    हृदयस्पर्शी जज्बात..
    :-)

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    1. रीना बहन धन्यवाद

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