Friday, August 23, 2013

चलो मोदी को नहीं लाते..................बलवीर कुमार


चलो मोदी को नहीं लाते हैं.....|
कोई और विकल्प बताते है.....||

चलो नेहरु को ले आते हैं, 
एक और पाकिस्तान बनाते हैं.....|

हम खून पसीना बहा कर आयकर चुकायेगे,
और वो अपना कोट विदेश में धुलवायंगे......||

चलो हाथी पर भरोसा जताते हैं, 
जो लडते हैं धर्म के नाम पर.....|
उन्हें जात के नाम पर लड़वाते हैं......||

चलो साइकल में हवा भरवाते हैं, 
शहर में जंगल राज चलवाते हैं.....|
अनपढ़ से आइयाशी और पढ़े लिखो से
रिक्शा चलवाते है.....||

या सर्वोतम विकल्प फिर से कांग्रेस को लाते हैं,
बच्चों से राहुल की जीवनी पढवाते हैं....|
आँखों पर पट्टी बांध कर खाई में कूद जाते है.......||

आज समझ आया क्यूँ अक्सर विदेशी,
कुत्तों और भारतीयों पर रोक लगाते हैं.....|
क्यूंकि कुत्ते घी और हम शांति, सत्य,सकून
और इज्ज़त हजम नहीं कर पाते हैं....||

एक आजम खां जो भारत माँ को डायन कहता है.....|
एक दिग्विजय जो हर औरत को टंच समझते हैं.....||

किसी को भी सत्ता में लाते हैं, 
बाऊ बाऊ चिलाते है....|
नहीं मोदी को नहीं लाते हैं, 
कोई और विकल्प बताते है.....||

--बलवीर कुमार
balvir.kumar@expressindia.com

15 comments:

  1. बहुत बढ़िया है आदरेया-
    रचयिता को भी बधाई-

    कसके धो कर रख दिया, पूरा दिया निचोड़ |
    मुद्रा हुई रसातली, भोगें नरक करोड़ |
    भोगें नरक करोड़ , योजना बनी लूट की |
    पाई पाई जोड़, गरीबी लगा टकटकी |
    पर पाए ना लाभ, व्यवस्था देखे हँस के |
    मोदी पर संताप., मचाती सत्ता कसके ||

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति

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  4. हकीकत बयान करती व्यंगात्मक रचना !!

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  5. सच है किस पर भरोसा करें
    राष्ट्र हित में अब सोचता कौन है ....
    बढ़िया व्यंग्य !

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  6. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना शनीवार यानी 24/08/2013 के ब्लौग प्रसारण में मेरा पहला प्रसारण पर लिंक की गयी है...
    इस संदर्व में आप के सुझावों का स्वागत है।

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  7. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शनिवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  8. सुन्दर व्यंग्य

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  9. कसके धो कर रख दिया, पूरा दिया निचोड़ |
    मुद्रा हुई रसातली, भोगें नरक करोड़ |
    - रविकर जी
    के कथन से सहमत !

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  10. बेहतरीन रचना ...... बिना निरमा.....एरियल डाले ही धो डाला ...

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  11. बहुत सुन्दर रचना , बहुत समय से ऐसी ही कुछ रचनाओ का इन्तजार था।

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  12. जनता के असमंजस का सही छाया चित्र. साधुवाद.

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