Friday, August 23, 2013

समन्दर हो के भी सहरा है आँसू..............अन्सार कम्बरी



तेरी पलकों पे जो ठहरा है आँसू
समन्दर से भी वो गहरा है आँसू

कहा था घर से मत बाहर निकलना
अजी सुनता नहीं बहरा है आँसू

ख़ुशी दिल में कोई आये तो कैसे
लगाये आँख पर पहरा है आँसू

समन्दर हो के भी प्यासी हैं आँखे
समन्दर हो के भी सहरा है आँसू

अरे सुन ‘क़म्बरी’ दिल के महल पर
कोई परचम नहीं फहरा है आँसू

-अन्सार कम्बरी

2 comments:

  1. कहा था घर से मत बाहर निकलना
    अजी सुनता नहीं बहरा है आँसू.......
    वाह ,बहुत सुन्दर

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  2. वाह ,बहुत सुन्दर

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