Tuesday, August 13, 2013

ऋतुयें अभिनन्दन करें, ऐसा मेरा देश.....अन्सार कम्बरी


चाँदी जैसा ताज है, सोने जैसे केश |
ऋतुयें अभिनन्दन करें, ऐसा मेरा देश ||

क्या खोकर पाया इसे, कितनी है अनमोल |
पूछो किसी शहीद से, आज़ादी का मोल ||

चंदा-सूरज से लगे, गाँधी और सुभाष |
आज़ादी का देश में, लाये नया प्रकाश ||

तब के नेता देश को, करा गये आज़ाद |
अब के नेता देश की, हिला रहे बुनियाद ||

केवल अपने देश के, नेता हुये स्वतंत्र |
जनता ही परतंत्र थी, जनता है परतंत्र ||

अंधे गद्दी पा गये, बहरे हुये महान |
हम कहते हैं खेत की, वे सुनते खलिहान ||

सावधान रहिये सदा, अब उनसे श्रीमान |
जो कोई पहने मिले, खादी का परिधान ||

इनकी टेढ़ी चाल को, नहीं सकोगे भाँप |
खादी पहने घूमते, इच्छाधारी साँप ||

मानचित्र पर लाख तुम, खींचा करो लकीर |
जिसका हिन्दुस्तान है, उसका है कश्मीर ||

चाहे बंगला देश हो, चाहे पाकिस्तान |
ये भी हिन्दुस्तान है, वो भी हिन्दुस्तान ||

नेता करें विकास का, बस्ती-बस्ती शोर |
देखा किसने ‘क़म्बरी’, वन में नाचा मोर ||

-अन्सार कम्बरी

15 comments:

  1. बेहतरीन दोहे

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक आज मंगलवार (13-08-2013) को "टोपी रे टोपी तेरा रंग कैसा ..." (चर्चा मंच-अंकः1236) पर भी होगा!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. बहुत सुन्दर ,सटीक अभिव्यक्ति !
    latest post नेता उवाच !!!
    latest post नेताजी सुनिए !!!

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  4. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन भावभिव्यक्ति ...:)

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  5. चाहे बंगला देश हो, चाहे पाकिस्तान |
    ये भी हिन्दुस्तान है, वो भी हिन्दुस्तान
    ......हाँ आखिर अलग हुआ तो क्या है तो अपने ही अंग .
    बहुत बढ़िया .

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  6. बहुत ही सार्थक रचना।बहुत बढ़िया

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  7. हम कहते हैं खेत की, वे सुनते खलिहान.....
    वाह....बहुत खूब...बेहद सटीक अभिव्यक्ति...साभार....

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  8. आपकी यह रचना कल बुधवार (14-08-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  9. बहुत सुंदर रचना...सटीक अभव्यिक्‍त‍ि

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  10. बहुत ही सुन्दर ..अद्भुत !

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  11. Sundar ..sateek ... Lajawab dohe ... Mitti ki sugandh liya ...

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  12. बहुत बढ़िया.. स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

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