Tuesday, April 2, 2013

तेरे बिछुडन से बेहाल हुए हम............... रमेश पासी

तन्हाइयों में रह कर
बर्बाद हो गए है हम

जब से ये आई है तन में
चुप रहते है हम

शाम सुहानी खुशियाँ भरने वाली
वो दर्द जगाये दिल में

देख को उनको मन भी भरमाये
भूल गए सब दोस्तों को

अब तो अलग थलग पड़ गए रे हम
दिन तो बीते यादों में

रात कि गहरे में डूबे मन
जब भी छोड़ के भागूं तन्हाई को

तेरा साया पीछा करता हरदम
तन भी सुखा मन भी डूबा

रोनी सी सूरत हो गई रे
कहने को तो खुश हूँ
तेरे बिछुडन से बेहाल हुए हम

--रमेश पासी

9 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज मंगलवार (02-04-2013) के चर्चा मंच-1202 पर भी होगी!
    सूचनार्थ...सादर!

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  2. बहुत ही सुन्दर और उत्कृष्ट रचना,आभार.

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  3. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति! मेरी बधाई स्वीकारें।

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  4. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 05-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। आप भी इस हलचल में अवश्य शामिल होना।
    सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

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  5. viyog jaha kashtkari hota hai vahi milan ki pratiksha
    ka sukh bhi samete huye hota hai

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  6. सुन्दर एवं भावपूर्ण उत्कृष्ट रचना

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  7. bahut hi sundar wa sarthak rachana

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  8. तुम तो बस दे कर चले गए,कैसे निपटू इन यादों को,.
    शाम सवेरे उमड़ जाती हैं, दिल में तो
    ,जो तनहा कर देती दिन रातों को,
    समझाए न समझती बस पीछा करती उन बातों को.

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