Thursday, April 11, 2013

निधि टण्डन की दो लाइने....फेसबुक से



यूँ तो ज़िंदगी के सारे सबक जुबानी याद हैं मुझे
जब तुम सामने आते हो तो सब भूल जाता हूँ मैं



 तुमसे जुदा होकर यूँ बिखर गयी मैं
समेटने की न ताक़त न चाहत बाक़ी



तुमने चूमा था जब पेशानी को मेरी
रंगत होठों की लवों तक उतर आयी थी



बारीक़ सा फ़ासला तफ़सील से निभाया उसने
जो मैंने नहीं चाहा था वही कर दिखाया उसने



ज़िंदगी के वो तमाम पहलू जिनमें तुम शामिल नहीं हो
मैं अलग हो गयी उनसे या उन्हें खुद से जुदा कर दिया


निधि टण्डन की दो लाइने....फेसबुक से
बहन निधि की दो लाईने भी होश उड़ा देती है कभी-कभी

9 comments:

  1. वाह लाजवाब रचना |

    तुमने चूमा था जब पेशानी को मेरी
    रंगत होठों की लवों तक उतर आयी थी..

    बहुत उम्दा प्रस्तुति |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  2. बहुत बढ़िया....
    आज ही ख़याल आया था कि निधी अपनी दो लाइनें ब्लॉग में पोस्ट क्यूँ नहीं करतीं....
    शुक्रिया यशोदा.
    सस्नेह
    अनु

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  3. waaaaaaaaaah kya kheni waaah !!!!!

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  4. वाह्ह्ह्हह्ह बहुत सुन्दर

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    नवरात्रों और नवसम्वतसर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ...!

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  6. नवरात्रों और नवसम्वतसर-२०७० की हार्दिक शुभकामनाएँ.... !!
    ज़िंदगी के वो तमाम पहलू जिनमें तुम शामिल नहीं हो
    मैं अलग हो गयी उनसे या उन्हें खुद से जुदा कर दिया .......
    प्यार में पग कर जोगन बन जाना इसी को कहते हैं .....।
    उम्दा अभिव्यक्ति !!

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  7. This comment has been removed by the author.

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  8. बहुत सुन्दर शेर हैं .....रोज पोस्ट होने वाली इन दो लाइनों के बिना सुबहें अधूरी लगती हैं :)

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