Friday, March 8, 2013

"विश्व महिला दिवस".........................यशोदा

आज आठ मार्च...
यानि "विश्व महिला दिवस",..
साल का वह एक दिन....
जब महिलाओं को लेकर....
बहुत कुछ कहा जाता है
और सुना भी जाता है......
अधिकारों की बात होती है..

और इस बात में
शिक्षा और सुरक्षा साथ होती है
अनुपात, स्वतंत्रता और स्वास्थ्य
इन सभी की बात होती है
इस दिन उपहारों और सौगातों की
बरसात होती है......
और नहीं होती तो...
बस एक यही बात जो
नही होती....
इस दिन चिन्तन का
हिस्सा नहीं बनती..
और जो अहम है
"एक महिला और उसके सपने"

--यशोदा दिग्विजय

12 comments:

  1. बस एक यही बात जो
    नही होती....
    इस दिन चिन्तन का
    हिस्सा नहीं बनती..
    और जो अहम है
    "एक महिला और उसके सपने"

    sach hai

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  2. behatareen prastuti,swagat hai in panktion se aap ki rachna hai."vytha katha nari jivan ki,pal pal ki smrition me hai,kabhi dikhi bhagini,si vo tao kabhi rachi basi krition me,liye hath apne surbhit mala,dip jalati pag pag pr vh ban prakash punj,hai rachi bahi jan shrutio me vah,,,बस एक यही बात जो
    नही होती....
    इस दिन चिन्तन का
    हिस्सा नहीं बनती..
    और जो अहम है
    "एक महिला और उसके सपने"

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    1. शुक्रिया भाईजान

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  3. सच में ...पर जो बातें होती हैं वो भी बातें भर हैं..... सुंदर रचना

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  4. महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें .

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  5. शुभकामनायें आदरेया-
    सादर नमन ||

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  6. इस दिन चिन्तन का
    हिस्सा नहीं बनती..
    और जो अहम है
    "एक महिला और उसके सपने"

    --यशोदा दिग्विजय --
    याद दिलाने के लिये शुक्रिया छोटी बहना :))
    शुभकामनायें !!

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  7. जब तक मनोवृति संकुचित रहेगी .....बातें ...कोरी बातें ही रहेगीं चिंतन की कौन कहे

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  8. इस दिन चिन्तन का
    हिस्सा नहीं बनती..
    और जो अहम है
    "एक महिला और उसके सपने"
    --------------------------
    बिलकुल बुनियादी और जमीनी बात ..

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    1. असर के लिए वर्ष में एक दिवस नहीं 365 दिवस ज़रूरी हैं,,,,,,,,,,,,,और यह बात हर दिवस के लिए लागू होगी...............

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