Friday, March 15, 2013

ये तो सोचो तुम्हारी बच्ची है..........अन्सार कम्बरी



थोड़ी झूठी है, थोड़ी सच्ची है

हाँ ! मगर बात बहुत अच्छी है


मैं तेरी उम्र बताऊँ कैसे

थोड़ी पक्की है, थोड़ी कच्ची है



तू है कैसी मैं कह नहीं सकता

तेरी तस्वीर बहुत अच्छी है



एक सिक्का है ज़िन्दगी अपनी

है कभी सन तो कभी मच्छी है



उसको मारो न जन्म से पहले

ये तो सोचो तुम्हारी बच्ची है



अन्सार कम्बरी

8 comments:

  1. तू है कैसी मैं कह नहीं सकता
    तेरी तस्वीर बहुत अच्छी है ....

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  2. सुंदर रचना .........
    साभार.....

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति. सच कहा आपने

    आज की मेरी नई रचना
    एक शाम तो उधार दो

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  4. सुन्दर प्रस्तुतीकरण.

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  5. आपकी रचना निर्झर टाइम्स पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें http://nirjhar-times.blogspot.com और अपने सुझाव दें।

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