Sunday, March 24, 2013

मुझे तुम याद रहती हो.....................सुनील मिश्र




तुम मुझे याद रहती हो....
तुम अपनी आँखे मूंदे हो
इधर मैं जागता हूँ
तुम्हारे तकिये का नीचे
मेरी रातें इकट्ठा हैं..



मुझे तुम याद रहती हो
खुली और बंद आँखों मे


मेरे सपनों में न जाने 
कितनी बातें इकट्ठा हैं..




मुझे भूले नहीं कुछ सच
पुरानेऔर सुख बीते जमाने के

उन्हीं सच और सुख की पुरनम
मुलाकातें इकट्ठा हैं......





बड़े चुपके से आई पास
और नींद ले गई चुपचाप

तुम्रे पास मेरी खुशियों की
सौगातें इकट्ठा हैं.....

--सुनील मिश्र


10 comments:

  1. मेरे सपनों में न जाने
    कितनी बातें इकट्ठा हैं..
    -------------------
    sundar. badhiya



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  2. samvedanshil aur bhav pradhan prastuti

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  3. बड़े चुपके से आई पास
    और नींद ले गई चुपचाप
    तुम्रे पास मेरी खुशियों की
    सौगातें इकट्ठा हैं.....

    बेहद सुंदर भाव !

    होली की बहुत बहुत मुबारक

    नई पोस्ट

    अब की होली
    मैं जोगन तेरी होली !!

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  4. तुम मुझे याद रहती हो....
    तुम अपनी आँखे मूंदे हो
    इधर मैं जागता हूँ
    तुम्हारे तकिये का नीचे
    मेरी रातें इकट्ठा हैं..

    तुम्रे पास मेरी खुशियों की
    सौगातें इकट्ठा हैं.....


    waah! Bahut sundar:-)

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  5. बहुत सुन्दर रचना...
    होलिपर्व की शुभकामनाएँ...
    :-)

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  6. बहुत सुन्दर!
    आपको होली की शुभकामनाएं!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  7. मुझे भूले नहीं कुछ सच
    पुरानेऔर सुख बीते जमाने के
    उन्हीं सच और सुख की पुरनम
    मुलाकातें इकट्ठा हैं......

    YADON KE BHI KAYEE SWAROOP HAEN,KABHI BHI KAISE BHI AAJAYEN........sanwedna bhari rachna......

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  8. बहुत खूब .आपको होली की हार्दिक शुभ कामना .

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