Tuesday, September 9, 2014

क्यूं हाथ लगी रुसवाई है..........देव वंश दुबे

 

  
कांटों में जो थोड़ी महक समाई है
फूलों ने ही दरियादिली दिखाई है

हो जाता गुलज़ार फलक पूरे दिल का
हंसती जब कोई कभी रोशनाई है

दुनिया से तो प्यार जताया है लेकिन
ना जाने क्यूं हाथ लगी रुसवाई है

सपनों को साकार बनाऊं फिर कैसे
राहों में पर्वत या फिर खाई है

न करता आंखों से चूमूं दरिया को
करता जो प्यासों की ही अगुआई है

-देव वंश दुबे
...........हेल्थ, पत्रिका से

4 comments:

  1. लाज़वाब
    दुनिया से तो प्यार जताया है लेकिन
    ना जाने क्यूं हाथ लगी रुसवाई है
    सपनों को साकार बनाऊं फिर कैसे
    राहों में पर्वत या फिर खाई है

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के - चर्चा मंच पर ।।

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