Friday, September 5, 2014

कई ज़माने देखे..................-गोविन्द भारद्वाज






हमने कई ज़माने देखे,
दोस्त नये-पुराने देखे.

नशे मुक्त शहरों में हमने,
गली-गली मयखाने देखे

प्रेम नगर की इस बस्ती में
राह खड़े दीवाने देखे.

रपट कहां कोई लिखवाए
गुण्डो के घर थाने देखे

इन वीरानी-सी आँखों में
ख्वाब कई सुहाने देखे

बेच ज़ायदाद ब़ुज़ुर्गों की
दौलतमंद सयाने देखे

-गोविन्द भारद्वाज
 
........... मधुरिमा से

10 comments:

  1. इन बेवड़ों ने पहले तो पूजा स्थलों को अपवित्र किया, अब ये शिक्षा के मंदिरों को अपवित्र करने पर तूलें हैं.....

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (06-09-2014) को "एक दिन शिक्षक होने का अहसास" (चर्चा मंच 1728) पर भी होगी।
    --
    सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को नमन करते हुए,
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को शिक्षक दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. रपट कहां कोई लिखवाए
    गुण्डो के घर थाने देखे ! बहुत खूब !

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  4. अरे वाह .... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति
    साझा करने का आभार

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  5. प्रेम नगर की इस बस्ती में
    राह खड़े दीवाने देखे.
    बहुत खूब !

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  6. बेहतरीन

    सादर

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  7. बहुत ही अच्छा ।
    http://dharmraj043.blogspot.com/2015/01/blog-post.html

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