Wednesday, September 17, 2014

नयी पीढ़ी का गीत......दुष्यन्त कुमार



  
जो मरुस्थल आज अश्रु भिंगो रहे हैं
भावना के बीज जिस पर बो रहे हैं
सिर्फ मृग-छलना नहीं वह चमचमाती रेत!

क्या हुआ जो युग हमारे आगमन पर मौन?
सूर्य की पहली किरण पहचानता है कौन?
अर्थ कल लेंगे हमारे आगमन का संकेत।

तुम न मानो शब्द कोई है नामुमकिन
कल उगेंगे चांद-तारे, कल उगेगा दिन,
कल फ़सल देंगे समय को, यही "बंजर खेत"।

-दुष्यन्त कुमार
....मधुरिमा से

5 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18-09-2014 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1740 में दिया गया है ।
    आभार ।

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  2. Ummeedein rwaan kar dete hain Dushyant kumar ji apni lekhani se.... Bahut sunder !!

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  3. वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
    हालाकि जिनकी यह रचना है उन्हे दाद देने की औकात नही है
    फिर भी...........

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