Sunday, March 4, 2018

मुखर मेल......अलका गुप्ता

नाट्यकार सा !
जीवन रंग मंच !
शाज मुखौटा !
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मुखर मेल !
सुख-दुखिया खेल !
नकाब पोशी !
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धुनी रमाए !
साधु भए सियार !
छले मुखौटा !
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मांजे चेहरे !
पहन शराफ़त !
डाले ये डाँके !
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साजें तन क्या !
माटी घट ये चोला !
रूह..बुहारें !
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लेने दो साँस !
आत्मा को संस्कार की !
नश्वर तन !
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श्वास ले आत्मा !
अक्षय..अमर वो !
तन ये चोला !

टिप्पणी में एक ताँका__

रंग रंग के !
रूप-कुरूप मास्क !
शुभ-अशुभ !
घाव..घने..या हास !!

जीवंत जिएं विलास !!
-अलका गुप्ता

प्राप्ति स्त्रोत्रः
तस्वीर क्या बोले


5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (05-03-2018) को ) "बैंगन होते खास" (चर्चा अंक-2900) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. वाह बहुत सुन्दर
    देखना में छोटे लगें ... घाव करें गम्भीर ...

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