Sunday, January 10, 2016

बेवफाई का है अजब आलम....कुँवर कुसुमेश


लोग जो महवे-यार मिलते हैं। 
आजकल बेक़रार मिलते हैं।

और तेवर मेरे सनम के तो,
बाखुदा धार दार मिलते हैं।

दुश्मनों की नहीं कमी कोई,
एक ढूँढो हज़ार मिलते है।

खुशनसीबी मेरी है दोस्त मुझे,
क़ाबिले-ऐतबार मिलते हैं।

बेवफाई का है अजब आलम ,
अब कहाँ जाँ-निसार मिलते हैं।

एक सिहरन है लाज़िमी उठना,
जब "कुँवर" दिल के तार मिलते है।

-कुँवर कुसुमेश

3 comments:

  1. बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति।

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  2. जय मां हाटेशवरी...
    आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...

    इस लिये दिनांक 11/01/2016 को आप की इस रचना का लिंक होगा...
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर...
    आप भी आयेगा....
    धन्यवाद...

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  3. दुश्मनों की नहीं कमी कोई,
    एक ढूँढो हज़ार मिलते है।

    वाह क्या बात है बहुत सुन्दर लिखा है। आप मेरी वेबसाइट जरूर देखिये http://www.couponzpoint.com इसमें आपको ७०% तक के Coupons मिलेंगे।

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