Friday, January 1, 2016

उम्मींदों की पोटली है मेरे काँधे पे.....सदा










सिमट रहे हैं 
कुछ लम्हे उसके आगोश में 
कुछ उस तक 
पहुँचने की फि़राक़ में हैं 
कुछ कद के छोटे हैं 
तो दबे हैं भीड़ में 
पर सब साथ हैं उसके
क्यूं कि उसने सबको
कुछ न कुछ दिया है !
.. 
खुशियों और गम के आँसू 
झिलमिलाये हैं उसकी पलकों पर भी 
अतीत के पन्नों में कैद हो 
इससे पहले वो 
कहना चाहता है तुम्हे 
मुबारक हो नया साल 
जो मिला उसे तक़दीर समझना 
जो चाहते हो 
उसके लिये दुआयें हैं मेरी 
उम्मींदों की पोटली है मेरे काँधे पे 
दिन तारीख वर्ष 
फिर गवाह बनेंगे 
इन्ही शुभकामनाओं के साथ 
मेरा हर दिन लम्हा 
तुम्हारे लिये है !!

-सीमा सदा

7 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (02-01-2016) को "2016 की मेरी पहली चर्चा" (चर्चा अंक-2209) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    नववर्ष 2016 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. उत्कृष्ट प्रस्तुती, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुती,आपको सपिवार नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  4. ऩव वर्ष की मंगल कामनाएँ। सुंदर प्रस्तुति।

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