Thursday, December 27, 2012

तुम्हारे नेह का हरसिंगार...............'फाल्गुनी'



नहीं दिखता तुम्हारी आँखों में
अब वो शहदीया राज
नहीं खिलता देखकर तुम्हें
मेरे मन का अमलतास, 


नहीं गुदगुदाते तुम्हारी
सुरीली आँखों के कचनार
नहीं झरता मुझ पर अब
तुम्हारे नेह का हरसिंगार, 

सेमल के कोमल फूलों से
नहीं करती माटी श्रृंगार
बहुत दिनों से उदास खड़ा है
आँगन का चंपा सदाबहार, 

रिमझिम-रिमझिम बूँदों से
मन में नहीं उठती सौंधी बयार
रुनझून-रुनझून बरखा से
नहीं होता है सावन खुशगवार, 

बीते दिन की कच्ची यादें
चुभती है बन कर शूल
मत आना साथी लौटकर
अब गई हूँ तुमको भूल।

--स्मृति जोशी 'फाल्गुनी'



5 comments:

  1. बीते दिन की कच्ची यादें
    चुभती है बन कर शूल
    मत आना साथी लौटकर
    अब गई हूँ तुमको भूल।
    ...................
    sundar rachna, par itni niraashaa kis baat ki...

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    1. नैराश्य भी एक भावना ही है
      एक पुराना गीत सुना होगा
      कहूँ क्या आस निराश भई....ये गीत हमारे आपके जन्म से पहले का है

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  2. sundar bhavo se paripurit ahsahनहीं दिखता तुम्हारी आँखों में
    अब वो शहदीया राज
    नहीं खिलता देखकर तुम्हें
    मेरे मन का अमलतास,


    नहीं गुदगुदाते तुम्हारी
    सुरीली आँखों के कचनार
    नहीं झरता मुझ पर अब
    तुम्हारे नेह का हरसिंगार,

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  3. शुभप्रभात छोटी बहना :)

    बीते दिन की कच्ची यादें
    चुभती है बन कर शूल
    मत आना साथी लौटकर
    अब गई हूँ तुमको भूल।

    जिसे भूलना कहे दिल ,मन लगातार याद करता है :))

    शुभकामनायें !!

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  4. उम्दा पोस्ट |
    आशा

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