Friday, February 1, 2013

कहानी हीर-रांझा की पुरानी थी, पुरानी है..........श्रद्धा जैन


मेरे दामन में काँटे हैं, मेरी आँखों में पानी है

मगर कैसे बताऊँ मैं ये किसकी मेहरबानी है


खुला ये राज़ मुझ पर ज़िंदगी का देर से शायद

तेरी दुनिया भी फानी है, मेरी दुनिया भी फ़ानी है


वफ़ा नाज़ुक सी कश्ती है ये अब डूबी कि तब डूबी

मुहब्बत में यकीं के साथ थोड़ी बदगुमानी है


तुम्हें हम फासलों से देखते थे औ'र मचलते थे

सज़ा बन जाती है कुरबत, अजब दिल की कहानी है


मिटा कर नक्श कदमों के, चलो अनजान बन जाएँ

मिलें शायद कभी हम-तुम, कि लंबी ज़िंदगानी है


ये मत पूछो कि कितने रंग पल-पल मैंने बदले हैं

ये मेरी ज़िंदगी क्या, एक मुजरिम की कहानी है


किताबे-उम्र का बस इक सबक़ ही याद है मुझको

तेरी कुर्बत में जो बीता वो लम्हा जावेदानी है


वफ़ा के नाम पर 'श्रद्धा' न हो कुर्बान अब कोई

कहानी हीर-रांझा की पुरानी थी, पुरानी है

---------श्रद्धा जैन

13 comments:

  1. किताबे-उम्र का बस इक सबक़ ही याद है मुझको
    तेरी कुर्बत में जो बीता वो लम्हा जावेदानी है
    उम्दा अभिव्यक्ति ....!!

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  2. Atyant zordaar...sarthak prayaas ke liye badhai....

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    1. शुक्रिया रतन भाई

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  3. Behatareen Sada Ji,"sadayee aap ki poonam ka chand ho jaye,tabassum aap ke chehare ka ban noor cha jaye,>>>>>>" मेरे दामन में काँटे हैं, मेरी आँखों में पानी है

    मगर कैसे बताऊँ मैं ये किसकी मेहरबानी है


    खुला ये राज़ मुझ पर ज़िंदगी का देर से शायद

    तेरी दुनिया भी फानी है, मेरी दुनिया भी फ़ानी है


    वफ़ा नाज़ुक सी कश्ती है ये अब डूबी कि तब डूबी

    मुहब्बत में यकीं के साथ थोड़ी बदगुमानी है

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  4. मुहब्बत में यकीं के साथ थोड़ी बदगुमानी है...
    man mijaj ki rachna..

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  5. बहुत ही खूबसूरत शेर

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  6. मिटा कर नक्श कदमों के, चलो अनजान बन जाएँ
    मिलें शायद कभी हम-तुम, कि लंबी ज़िंदगानी है---बहुत खुबसूरत अभिव्यक्ति है .
    New postअनुभूति : चाल,चलन,चरित्र
    New post तुम ही हो दामिनी।


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  7. Very nice!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  8. भावों से नाजुक शब्‍द.....

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  9. बहुत खूब भाव पूर्ण प्रस्तुति

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    एक शाम तो उधार दो

    मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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