Tuesday, June 13, 2017

महसूस कर लिया मैंनें..........अनमोल तिवारी कान्हा
















पत्र तुम्हारा मिल गया कोरा
देखकर पढ़ा मैंने 
और चूमा उसे
कलेजे से लगाकर रख दिया,
अनकही थी जो बातें 
वो सब खुल गई
कालिमा मन में भरी थी
वो सब धुल गई।।
छेड़ दी सरगमें चाहत की
कितना लिखे कैसे लिखे ?
शब्द थे कम
इसलिए तुमने तुम्हारे पत्र में
कुछ नहीं लिखकर भी
सब कुछ लिख दिया
और मैंने देखकर पढ़ा चूमा
और सीने से लगाकर रख दिया।

बड़ा अजीब है
तुम्हारे कहने का ढंग
बिना शब्दों के भी सब
महसूस कर लिया मैंने।।
-अनमोल तिवारी कान्हा
शब्दावली: 
कोरा=खाली(बिना लिखा), कालिमा=दुर्भावनाँए, सरगमें=राग संगीत

3 comments:

  1. प्रेम अनुभूति....
    बहुत ही सुन्ददर

    ......

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (15-06-2017) को
    "असुरक्षा और आतंक की ज़मीन" (चर्चा अंक-2645)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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