Monday, June 12, 2017

सच में है दीन जिन्दगी....श्यामल सुमन

जो दिखती रंगीन जिन्दगी
वो सच में है दीन जिन्दगी

बचपन, यौवन और बुढ़ापा
होती सबकी तीन जिन्दगी

यौवन मीठा बोल सके तो
नहीं बुढ़ापा हीन जिन्दगी

जीते जो उलझन से लड़ के
उसकी है तल्लीन जिन्दगी

वही छिड़कते नमक जले पर
जिसकी है नमकीन जिन्दगी

दिल से हाथ मिले आपस में
होगी क्यों गमगीन जिन्दगी

जो करता है प्यार सुमन से
वो जीता शौकीन जिन्दगी
-श्यामल सुमन....फेसबुक से

3 comments:

  1. वाकई बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (13-06-2017) को
    रविकर यदि छोटा दिखे, नहीं दूर से घूर; चर्चामंच 2644
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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