Sunday, September 1, 2013

हालात से दो-दो हाथ............श्रीराम मीणा


देखिये उन बस्तियों को, फिर जलाता कौन है।
देखिये उन कश्तियों को, फिर डुबाता कौन है॥

गश्त, एवं कर्फ्यू का नाम आजादी नहीं-।
देखिये उन गश्तियों को, फिर लगाता कौन हैं॥

हम सभी भूखों मरें, वे राज हम पर कर रहे-।
देखिये उन हस्तियों को, फिर बनाता कौन हैं॥

हमने अपने खून से, हर शब्द लिक्खा है जहां।
देखिये उन नश्तियों को, फिर जलाता कौन हैं॥

चलाते चमड़े के सिक्के, एक दिन के बादशाह।
देखिये उन भिश्तियों को, फिर बनाता कौन हैं॥

-श्रीराम मीणा

6 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [02.09.2013]
    चर्चामंच 1356 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
    सादर
    सरिता भाटिया

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  2. सुन्दर प्रस्तुति

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  3. वाह बहुत सुंदर ,

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